यहाँ ठहरने के लिए अब नहीं चलेगी वीआईपी सिफारिश

News Room Uttrakhand

रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने अभयारण्य में ठहरने और सफारी की सुविधा मुहैया कराने की अब किसी वीआईपी की सिफारिश नहीं मानने का फैसला किया है। सिफारिश करने वालों की शिकायत उच्चाधिकारियों से की जाएगी।

कॉर्बेट पार्क में राज्य अतिथि सेवा नियमावली के तहत केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, राज्य सभा सभापति, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, वित्त आयोग के अध्यक्ष, तीनों सेनाओं के प्रमुख, कैबिनेट सचिव को सुविधा मिलेगी।

कॉर्बेट प्रशासन के पास अधिकारियों और वीआईपी की ओर से अपने लोगों के लिए सफारी, ठहराने और अन्य सुविधाओं का ध्यान रखने की सिफारिशें आती रहती हैं। यह विशुद्ध रूप से निजी गतिविधि है और इससे सरकारी जिम्मेदारी का कुछ लेना-देना नहीं है।

इससे अभयारण्य प्रबंधन का काम प्रभावित होता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि भविष्य में ऐसे किसी निवेदन पर ध्यान नहीं दिया जाएगा और उस निवेदन को तुरंत मूल रूप में संबंधित कार्यालय को लौटा दिया जाएगा। ऐसी सिफारिशें भेजने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उनके वरिष्ठ अधिकारियों के पास मामले को भेजा जाएगा। 

उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य अतिथि को लेकर स्पष्ट नियम है। इसमें सांविधानिक पदों पर बैठे चुनिंदा लोगों को ही यह सुविधा प्राप्त है। इनमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष आदि शामिल हैं।

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