उत्तराखंड ने फिर खोया ‘लाल’, दूसरे मेजर के शहीद होने की खबर

National News Room

देहरादून। शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट की अंतिम यात्रा में सोमवार को जहां एक ओर भारी हुजूम दिल में देशभक्ति की भावना लिए उमड़ा था तो इसी बीच कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से लोहा लेते हुए दून का एक और लाल शहीद हो गया।

अचानक आई इस खबर से लोग सकते में आ गए। जिसने भी सुना, एक सुर में शहीद बेटों की शहादत का बदला लेने की आवाज उठाने लगा। डंगवाल रोड निवासी स्व. ओमप्रकाश ढौंडियाल के पुत्र मेजर विभूति कुमार ढौंडियाल सोमवार को पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए।

वह 34 वर्ष के थे। गत वर्ष अप्रैल में ही मेजर विभूति का विवाह फरीदाबाद निवासी निकिता कौल से हुआ था। निकिता कश्मीर विस्थापित परिवार से ताल्लुक रखती हैं। मेजर विभूति जनवरी के पहले सप्ताह में अप्रैल में शादी की पहली सालगिरह पर देहरादून आने का वादा कर ड्यूटी पर गए थे।

सोमवार को सुबह उनकी शहादत की खबर पत्नी निकिता कौल के फोन पर आई। निकिता उस समय दिल्ली जा रही थी। खबर सुनकर किसी तरह उन्होंने मेजर विभूति की मां सरोज ढौंडियाल को फोन पर उनके पैर में गोली लगने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी। वह दिल की मरीज हैं, इसलिए देर शाम तक भी उन्हें शहादत की खबर नहीं दी थी।

शाम करीब 5:30 बजे शहीद का पार्थिव शरीर सेना के विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुंच गया। जहां से सेना के वाहन में पार्थिव शरीर को मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाया गया। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर घर पर लाया जाएगा। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। देर शाम, शहीद मेजर की पत्नी निकिता और उनके परिजन भी देहरादून पहुंच गए। वह तीन बहनों के इकलौते भाई थे। पिता का 2012 में निधन हो चुका है। पत्नी दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी करती हैं।

शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल के दादा स्व. केशवानंद ढौंडियाल और पिता स्व. ओमप्रकाश ढौंडियाल रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक(वायुसेना) देहरादून में ऑडिटर के पद पर तैनात थे। मौसम खराब होने के बावजूद जिसने भी मेजर विभूति की शहादत की खबर सुनी, वह उनके घर की और दौड़ पड़ा। मां के दिल की मरीज होने की वजह से किसी को भी घर के भीतर तो नहीं जाने दिया गया लेकिन दिनभर लोग डंगवाल मार्ग पर जुटे रहे। 

शहीद मेजर तीन बहनों के इकलौते भाई थे। तीनों बहनें उनसे बड़ी हैं। घर में उनकी पत्नी, दादी और मां को मेजर डीएस ढौंडियाल की शहादत के बारे में नहीं बताया गया था। लेकिन बाद में सेना के अफसरों ने पत्नी को शहादत की खबर दे दी। वह कश्मीर विस्थापित परिवार से हैं। उनका परिवार दिल्ली में रहता है। पत्नी निकिता आज सुबह ही ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। शहीद की मां सरोज दिल की मरीज हैं। उन्हें अभी तक जानकारी नहीं दी गई है।

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