उत्तराखंड में अब सैलानियों को देना होगा कूड़ा-कचरा टैक्स

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देहरादून। देश-विदेश से चारधाम यात्रा के साथ ही देवभूमि भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों से अब सरकार कूड़ा करकट फैलाने के एवज में ‘वेस्ट मैनेजमेंट टैक्स’ वसूलेगी। सरकार पर्यटकों से यह टैक्स सीधे न वसूलकर होटल, धर्मशाला संचालकों के जरिये वसूलेगी। होटल, धर्मशाला संचालक पर्यटकों से कमरे के किराए के साथ ही यह टैक्स वसूलेंगे। जो बाद में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जमा कराया जाएगा।

सोमवार को वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की अध्यक्षता में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभागार में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि अब जैविक और अजैविक कूड़ा अलग-अलग नहीं देने पर नगर निगम प्रशासन भवन स्वामियों से इसे अलग करने के एवज में टैक्स वसूलेंगे।

वन मंत्री ने कहा कि राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, मंत्रियों के आवासों, नौकरशाहों के सरकारी आवासों के साथ ही तमाम सरकारी कॉलोनियों, राज्य संपत्ति के तमाम आवासों, होटलों, धर्मशालाओं, बहुमंजिलें अपार्टमेंट, निजी आवासों से निकलने वाले कूड़ा करकट को जैविक व अजैविक अलग-अलग करके ही देना होगा।

यदि ऐसा नहीं किया जाता है और इसे नगर निकायों द्वारा अलग किया जाता है तो उनसे टैक्स वसूला जाएगा। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इस संबंध में जल्द ही नीति बनाने के साथ ही इसे तेजी से धरातल पर उतारा जाए। 

डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि जिस तरीके से प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है, उसे देखते हुए कई ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने बैठक में उपस्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों, नगर निगमों के आयुक्तों, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों से कहा कि शहरों को साफ सुथरा बनाने के लिए इन निर्णयों का कड़ाई से पालन कराएं। 

बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि, मुख्य पर्यावरण अधिकारी डॉ. एसएस पाल, शहरी विकास निदेशक विनोद कुमार सुमन, नगर आयुक्त देहरादून विनय शंकर पांडे समेत सभी नगर निगमों, नगर निकायों, नगर पालिकाओं के अधिकारी उपस्थित थे।

वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने राज्य के नगर निकाय क्षेत्रों में निकलने वाले प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए मशीन लगाने को शहरी विकास निदेशक को एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा।

उन्होंने कहा कि इस धनराशि से नगर निकाय क्षेत्रों में मशीनें लगवाई जाएं ताकि प्लास्टिक कचरे का निस्तारण किया जा सके। प्लास्टिक कचरा एक बड़ी समस्या के तौर पर सामने आ रहा है। ऐसे में इसे नियंत्रित करने को लेकर ठोेस कदम उठाने होंगे।

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