सरकारी स्कूलों के बच्चों को नहीं मिला ड्रेस का पैसा

News Room Uttrakhand

देहरादून। गर्मियों की छुट्टियों के बाद सोमवार को स्कूल पहुंचने वाले बच्चों के पास किताबें तो नए सत्र की होगी, लेकिन वे पुरानी ड्रेस में ही नजर आएंगे। कुछ बच्चे ऐसे भी हैं, जिनकी पुरानी ड्रेस खराब हो चुकी है, ऐसे में उन्हें बिना ड्रेस के ही कक्षा में बैठना पड़ेगा। इसकी वजह ये है कि शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक बच्चों के खातों में ड्रेस का पैसा नहीं पहुंचा है। हालांकि डीबीटी योजना के तहत किताबों का पैसा बच्चों को मिल चुका है।

इस समय जिले में प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में एक लाख पचास हजार बच्चे अध्यनरत हैं। शिक्षा विभाग की ओर से गर्मी की छुट्टियों से पहले इन बच्चों के खातों में किताबों का पैसा भेज दिया गया था। इसमें प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को 250 रुपये और जूनियर स्कूल के बच्चों को चार सौ रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से दिया गया था। मगर अभी तक बच्चों के खातों में ड्रेस का पैसा नहीं पहुंचा है। यदि पिछले साल की बात करें तो पिछले साल प्रति बच्चे के खाते में 600 रुपये डाले गए थे। इनसे बच्चों को दो-दो जोड़ी ड्रेस बनाई जानी थी।

विभाग का ड्रेस न देकर रुपये खातों में भेजने के पीछे तर्क था कि स्कूलों की ओर से दी जाने वाले ड्रेस की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है। इस कारण अभिभावक पैसे निकालकर खुद ही ड्रेस बनवाए। मगर इस बार अभी तक बच्चों को ड्रेस का पैसा नहीं मिल पाया है। इसके अभिभावक अपने बच्चों को नई ड्रेस नहीं दिलवा पाए हैं। वहीं गर्मी की छुट्टियों के बाद आज यानी सोमवार को नए सत्र के लिए स्कूल खुल रहे हैं।

ऐसे में बच्चों के बस्ते में किताबें पर नई होंगी, लेकिन ड्रेस वहीं पुरानी होगी। उन्हें पुरानी ड्रेस में ही शिक्षा गृहण करनी पड़ेगी। वहीं कुछ ऐसे बच्चे भी हैं जिनकी ड्रेस खराब हो चुकी है या जिन्होंने पहली बार दाखिला लिया है, उन्हें कक्षा में बिना ड्रेस के ही बैठना पड़ेगा। उधर, विभागीय अधिकारी जल्द ही ड्रेस के पैसे आने के बाद खातों में भेजने का दावा कर रहे हैं। 

किताबों का पैसा बच्चों के खातों में पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक ड्रेस का पैसा नहीं मिला है। जैसे ही ड्रेस का पैसा मिलता है, खातों में भेज दिया जाएगा। सोमवार को गर्मी की छुट्टियों के बाद यथा समय स्कूल खुल रहे हैं।
– ब्रहमपाल सिंह सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी, बेसिक

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