‘आप’ ने कसी कमर, उत्तराखंड की सभी सीटों पर लड़ेगी चुनाव

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नई दिल्ली/देहरादून। पंजाब और गोवा के बाद उत्तराखंड तीसरा राज्य है, जहां आम आदमी पार्टी पूरी गंभीरता से चुनाव लड़ने जा रही है। पार्टी इसी सप्ताह उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा करने जा रही है। डेढ़ माह पहले राज्य में कराए गए एक सर्वेक्षण के नतीजों से उत्साहित होकर आप पार्टी ने उत्तराखंड को कर्मभूमि बनाने का मन बनाया है।

आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने माना कि वर्तमान में आप का बड़ा संगठन या नेटवर्क उत्तराखंड में नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि चुनाव पब्लिक की उम्मीद से लड़े जाते हैं, संगठन से नहीं। जनता की आशाएं साथ हों और नेताओं की नीयत ठीक हो, तो संगठन बनने में देर नहीं लगती। कहा- दिल्ली में भी आप के पास संगठन नहीं था, लेकिन पार्टी बनने के दो साल के भीतर ही आप ने कांग्रेस जैसी सवा सौ साल पुरानी और भाजपा जैसी चालीस साल पुरानी पार्टी को घुटनों पर बैठा दिया।

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में आप पार्टी को उत्तराखंडी आबादी से भरपूर समर्थन मिलता रहा है। उन्होंने देश की राजधानी में स्कूलों और अस्पतालों का कायाकल्प होते देखा है। उन्होंने ही पार्टी से अनुरोध किया कि आप पार्टी को उत्तराखंड की राजनीति में उतरना चाहिए।

इसके अलावा दिल्ली से उत्तराखंड लौटे प्रवासियों ने भी प्रदेश में लौटकर पाया कि कोरोना नियंत्रण और स्कूल सुधार के लिए प्रदेश में आप पार्टी को आना चाहिए। इसी फीडबैक के आधार पर आप ने डेढ़ माह पहले प्रदेश में एक व्यापक सर्वे कराया, जिसमें 62 प्रतिशत लोगों ने इच्छा जताई कि आप को उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेना चाहिए।

लेकिन क्या कांग्रेस और भाजपा के जनाधार में सेंध लगाना आसान होगा? इस सवाल के जवाब में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि बाकी देश की तरह उत्तराखंड में भी कांग्रेस खत्म हो चुकी है। कर्नाटक, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में लोगों ने देखा कि कांग्रेस को वोट देना बेकार है क्योंकि वे बाद में भाजपा से मिल जाते हैं। भाजपा खुश है कि विपक्ष खत्म हो चुका है इसलिए उसकी काम में रूचि नहीं रही। राज्य में भाजपा ने एक भी उल्लेखनीय काम किया तो कोई बताए।

कहा कि उत्तराखंड में भी दलबदल का इतिहास रहा है। भयानक नेतृत्वहीनता के इस दौर में उत्तराखंड की जनता इन दोनों पार्टियों से खिन्न है और बेहतर विकल्प चाहती है। इसलिए जनाधार बनने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आप का चुनाव आप के कार्यकर्ता नहीं, जनता लड़ेगी। वही आप को पैसा और वोट देगी, वही आप के लिए पैसा और वोट मांगेगी। उत्तराखंड की जनता चुनाव लड़ेगी, केजरीवाल नहीं।

केजरीवाल ने कहा कि रोजगार की कमी से पैदा हुआ पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और सरकारी स्कूल-कॉलेजों में अच्छी शिक्षा का अभाव, ये तीन मुद्दे उत्तराखंड के सबसे बड़े मुद्दे हैं। दिल्ली में आप पार्टी ने इन्हीं तीनों पर फोकस किया और जनता का विश्वास हासिल किया। उत्तराखंड में भी वही प्रयोग दोहराया जाएगा। प्रदेश के हर गांव की पहुंच में एक मोहल्ला क्लिनिक बनाया जाएगा।

शहरों की सुविधाओं को गांव तक पहुंचा कर पलायन रोका जाएगा। स्थानीय संसाधनों से जोड़कर स्वरोजगार और छोटे कारोबार को बढ़ावा देकर बेरोजगारी की समस्या दूर की जाएगी। देवभूमि के लिए आपदा प्रबंधन की विशेष रणनीति बनेगी। हर स्तर पर प्रकृति संरक्षण की व्यवस्था होगी। साथ ही पूरी दुनिया को धर्म सिखाने वाले इस प्रदेश में चारधाम समेत सभी आस्था केंद्रों की रक्षा और प्रोत्साहन का काम आगे बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आस्था और विकास एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। दोनों को मिलाकर उत्तराखंड का एक विशेष विकास मॉडल बनेगा और इस मॉडल को आप पार्टी नहीं, प्रदेश की जनता ही मिल बैठकर बनाएगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति, आपदा और समाधान, इनका सबसे अच्छा ज्ञान स्थानीय आबादी को होता है। आप पार्टी उसी स्थानीय प्रतिभा का सदुपयोग अपने नीति निर्णयों के लिए करेगी।

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