12 साल में पहली बार भारतीय शेयर बाजार में आयी भारी गिरावट, जानिए वजह

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मुंबई। भारतीय बाजार में कोरोनावायरस खौफ कायम है। सेंसेक्स में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखी गई। बीएसई का शेयर सूचकांक सर्किट खुलते ही 3600 अंक तक गिर गया। हालांकि, कुछ देर में संभला और अभी 313.76 अंक नीचे 32,464.38 पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह निफ्टी 91.60 अंक नीचे 9,498.55 पॉइंट पर कारोबार कर रहा है।

अपडेट्स

11:41 AM: सेंसेक्स 313.76 अंक नीचे 32,464.38 पॉइंट पर कारोबार कर रहा है। वहीं, निफ्टी 91.60 अंक नीचे 9,498.55 पॉइंट पर कारोबार कर रहा है।

11:26 AM: सेंसेक्स 110.36 अंक नीचे 32,667.78 पॉइंट पर, कैबिनेट ने टेलीकॉम कंपनियों को राहत देने को प्रस्ताव स्वीकार किया। वोडाफोन आइडिया के शेयर 23% उछले

11:02 AM: सेंसेक्स 318 अंक नीचे 32,459 पर, निफ्टी 65 पॉइंट नीचे 9524 पर।

10:53 AM: सेंसेक्स 38 मिनट में रिकवर करते हुए 300 पाइंट ऊपर।

10:47 AM: सेंसेक्स 30 मिनट में 3400 पॉइंट सुधरकर अब केवल 148 अंक नीचे।

सेंसेक्स में सिर्फ सन फार्मा के शेयर बढ़त में।

10:30 AM: सेंसेक्स 1160 अंक गिरकर 31,617 पर।

10:22 AM- सेंसेक्स में अभी भी 1481 अंकों की गिरावट।

10:10 AM- सेंसेक्स 3600 अंक गिरा।

9:23 AM सेंसेक्स में लोअर सर्किट लगा, 45 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकी गई; सेंसेक्स में 3091 और निफ्टी में 966 अंक की गिरावट

9:15 AM- शुक्रवार को बाजार खुलते ही 2534 अंक गिर गया। कुछ देर बाद ही बाजार 3103 अंक गिरकर 30,000 अंकों के नीचे पहुंच गया। बाजार में आई तेज गिरावट के कारण लोबर सर्किट लगा दिया गया है। इसके बाद ट्रेडिंग को 45 मिनट के लिए रोक दिया गया है। अभी सेंसेक्स 29,687.19 अंकों पर है। इसी तरह निफ्टी 852 अंक गिरकर खुला। थोड़ी देर में गिरावट बढ़कर 966.10 अंकों की हो गई। निफ्टी 8624 अंकों पर कारोबार कर रहा है। बाजार के 10% या उससे ज्यादा गिरने पर लोअर सर्किट लगा दिया जाता है।

सर्किट क्या है और यह कब लगता है?
भारतीय शेयर बाजार में अचानक आए बड़े उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए सर्किट लगाया जाता है। ये दो तरह के होते हैं। अपर सर्किट और लोअर सर्किट। अपर सर्किट तब लगाया जाता है जब बाजार एक तय सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है। सेबी ने अपर सर्किट के लिए तीन सीमाएं 10%, 15% और 20% तय की हैं। इसी तरह शेयर बाजार के तय सीमा से ज्यादा गिरने पर लोअर सर्किट लगाया जाता है। इसके लिए भी 10%, 15% और 20% तय की गई हैं। सर्किट की शुरुआत जुलाई 2001 सेबी की गाइडलाइन के बाद हुई थी।

कैसे लागू होता है सर्किट ब्रेकर
शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर लगाने का भी एक नियम है। एनएसई की वेबसाइट के अनुसार, अगर दोपहर 1 बजे के पहले शेयर बाजार 10 फीसदी बढ़े या गिरे तो सर्किट ब्रेकर के तहत अपर सर्किट या लोअर सर्किट लगाया जाता है। ऐसी स्थिति में ट्रेडिंग को 45 मिनट के लिए रोका जाता है। लेकिन अगर 1 बजे के बाद 10 फीसदी उतार-चढ़ाव दर्ज किया जाता है तो कारोबार को केवल 15 मिनट के लिए ही रोका जाता है।

सेंसेक्स के इतिहास में अब तक 4 बार लोअर सर्किट लग चुका है

सबसे पहला मौका 21 दिसंबर 1990 में आया था, जब सेंसेक्स में 16.19% की गिरावट दर्ज की गई थी। इस गिरावट के बाद शेयर बाजार 1034.96 के स्तर पर पहुंच गया था।

सेंसेक्स में दूसरी सबसे बड़ी गिरावट 28 अप्रैल 1992 में आई थी। तब सेंसेक्स में 12.77% की गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन शेयर बाजार 3896.90 के स्तर पर बंद हुआ था।

तीसरा मौका था 17 मई 2004 में आया, जब शेयर बाजार में 11.14% की गिरावट दर्ज की गई। तब शेयर बाजार 4505.16 के स्तर पर जाकर बंद हुआ था।

24 अक्टूबर 2008 को सेंसेक्स में 10.96% की गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन शेयर बाजार 8701.07 के स्तर पर बंद हुआ था।

30 साल में बाजार की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट

तारीखसेंसेक्स बंद हुआकितने % गिरा
21-12-1990103416.19%
28-04-1992389612.77%
17-05-2004450511.14%
24-10-2008870110.96%
12-05-199230869.76%
19-01-19907108.92%
06-05-199235608.41%
30-11-9011968.30%
31-03-199733608.26%
12-03-2020327788.18%
13-03-20202918410.7%

13 मार्च को बाजार 3600 अंक यानी 10.7% तक गिर गया। हालांकि आधे घंटे में ही संभल गया।

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