रेत के समंदर में

Poems

रेत के समंदर में

रेत के समंदर में,
कहीं दूर चले जाना है,

छोड़ जाना है सिर्फ़ कदमो के निशान
नही देखना मुड़ कर पीछे कंटीली झाड़िया,
या फिर कोई भी दे आवाज़,

रेत के समंदर में ,
चलते चले जाना है ढलते सूरज के संग,
कहीं दूर, कहीं दूर, और थक कर
रेत की बाहों में सो जाना है,
बस खो जाना है.

Leave a Reply