सास की कलम से

Dil se

कल शाम फेसबुक में एक पोस्ट Momspresso में आधुनिका चौधरी का ब्लॉग :- क्या बेटा बहू साथ ना घूमें. में काफ़ी सारे कॉमेंट्स पढ़ने को मिले, लगभग हर कॉमेंट में सास को लेकर ही शिकायतें थी. वैसे तो ये हर घर की कहानी है. चाहे सास पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ या कम पढ़ी लिखी हो, पता नहीं क्यों सास अपनी बेटी को तो बहुत प्यार देती हैं और बहू को हमेशा पराया समझती हैं? नहीं मालूम क्यों?

सौभाग्य से मेरे पास भी एक बेटी और एक बेटा है. बेटे की शादी हो चुकी है और बहू और उनका बच्चा मेरे ही पास है. जब से बहू शादी घर आई है, मेरे घर में रौनक हो गयी है. बेटी नौकरी करती है, दोनो ननद भाभी में गहरा प्यार है. दोनो ही जब कोई खरीदारी करती तो एक दूसरे के लिए गिफ्ट लेना नहीं भूलती.

मैने बहू को पहले ही दिन समझा दिया था कि मैं तुम्हारी सास नहीं हूँ मैं तुम्हारी सहेली हूँ. मेरे साथ दोस्ताना व्यवहार रखो. जिस दिन तुम कोई ग़लती करोगी, में माँ की तरह समझाउंगी. फिर भी नही समझी तो सास बन जाउँगी. फिर सास की तरह व्यवहार करूँगी, और सास का व्यवहार कैसा होगा सोच लेना. कभी भी किसी चीज़ की ज़रूरत हो, माँगने से नहीं हिचकिचाना . उसी समय ला कर दूँगी, उस समय कोई प्राब्लम हुई और ना ला सकी तो में तुमसे समय लूँगी ताकि अपने काम या प्रोबलम से निबट कर ला सकूँ.

हो सकता है तुम कोई ऐसा काम करो जिससे मुझे गुस्सा आए और कुछ ग़लत कह दूँ, मेरी कोई बात बुरी लगे, जब मेरा गुस्सा शांत हो जाए तो मुझे धीरे से अकेले में बता देना की मैं कहा ग़लत हूँ, क्या ग़लत बोला. मेरी कमियाँ मुझे बताना, इस तरह से और भी कई सारी बातें उसको समझाया

आज चार वर्ष होने को आए ईश्वर की कृपा से सब ठीक है, दोनो सास बहू दोस्त की तरह रहते है, एक दूसरे का ख्याल रखते है , कभी भी किसी बात को लेकर ज़रा सा भी मनमुटाव नहीं हुआ. मैं उन दोनो को कई बार कह चुकी हूँ कि दोनो अकेले घूम आओ बच्चा मैं संभालती हूँ, लेकिन दोनो ही नहीं मानते अकेले जाने को मुझको साथ लेजाते है. चाहे मेरी मर्ज़ी ना भी हो, तब भी मुझे उनके साथ जाना होता है.

वो आज भी पहले की तरह मेरे साथ दोस्त की तरह रहती है, मेरे पसंद नापसंद का ख्याल रखती है, कौन सा रंग मेरे ऊपर खिलता है, बताती है, किस ड्रेस के संग कौन सा शूज लू इसका ख्याल रखती है, और मैं भी उसका ख़्याल रखती हूँ,

बाकी ईश्वर की कृपा बनी रहे, और हम सास बहू की जोड़ी हमेशा अच्छे से बनी रहे यही दुआ करती हूँ.

राधा गौरांग

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