वाह री जिंदगी

Poems

खिड़की से झाँकती
सुबह की पहली किरण
मुझे जगाती है,

चिड़ियों की चहचहाट
मधुर संगीत सुनाती है

शाम होते ही, समंदर
की लहरें अपनी और बुलाती है,
चूम कर मेरे कदम, खिलखिलाती
वापस चली जाती है,

अब नहीं आते स्वप्न भयानक
सुनहरे सपने खुद ब खुद
पलकों पे सज जाते हैं

वाह री जिंदगी
कभी तो मायूस थी इतनी
के मौत भी गले लगाने से
कतराती थी,

और आज

मेरे कदम से कदम
मिला के
चलती है जिंदगी .

राधिका

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