भू-कम्प

News Room Uttrakhand

पृथ्वी के सीने में
ज़ोर का दर्द उठा,
वह दर्द से तड़पने लगी,
करवट पे करवट बदलने लगी,

वह कहलाया भू-कम्प.

हज़ारों घर हुए बर्बाद,
खेत खलिहान ढह गये,
लाखों हुए बेघर,
चारो तरफ हुई तबाही.

दोषी ठहराया गया भू – कम्प

सबने कहा- भूकंप ना आता,
तो ना होती तबाही,
ना कोई बेघर होता,
ना खेत खलिहान ढहते,
पशु ना मरते, मानव ना मरते,
कोई ना होता बर्बाद.

लेकिन किसी ने ये ना कहा,
वृक्ष ना कटते, ख़दानें ना होती,
प्रकृति का ना होता बेहताशा दोहन,
तो क्यों आता भूकंप?

क्यों होता पृथ्वी के सीने में दर्द?
क्यों कराहती, क्यों विचलित होकर
बदलती करवट?
क्योंकर आता भूकंप?

राधिका

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