नन्ही परी

Poems

इस सीने में
जाने कब से
ज़ख़्मों भरा
दिल समाया सा,
दर्द के मारे
तड़प रहा था,

गम की उस पर
गर्द जमी थी,
ज़ख़्मों का
इक ढेर
लगा था,

मैं जीवन से
ऊब गयी थी,
जीने की चाह
नहीं थी मुझको,

लेकिन जब से
तुम आई हो
मेरी नन्ही परी
दिल के हालत
बदल गये,

अब जीने की
चाह है मुझको.

…राधिका (राधा गौरांग)

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