ख्वाहिश छोटी सी

Short Stories

एक ख्वाहिश थी माँ की कि उसकी बेटी के पास एक छोटा सा घर हो,
एक छोटा सा आँगन, एक कोने में गुल्मोहर का पेड़ उसकी शाख पर झूला ,
बादलों से छनती मुठ्ठी भर धूप उस आँगन में हो.

लेकिन उसकी बिटिया के पास उच्च शिक्षा और हुनर तो था लेकिन धन का अभाव था
वो सिर्फ़ दो जून की रोटी और अपनी बिटिया की स्कूल की फीस ही दे पाती थी.
वो कभी अपनी माँ की ख्वाहिश उसके जीवित रहते पूरा नहीं कर पाई. और मां यही
ख्वाहिश लिए दुनिया छोड़ गयी.

वक़्त गुज़रता रहा, इसकी बिटिया भी बड़ी हो गयी, एजुकेशन भी पूरी हो गयी
और वो जॉब पे लग गयी.

और इस बिटिया ने अपनी माँ के लिए एक छोटा सा नहीं बल्कि एक बड़ा
सा आलीशान घर बना दिया, बड़ा सा आँगन बादलों से छन
कर आती ढेर सारी धूप, उस एक कोने पर गुल मोहर का पेड़ और उसकी शाख पर
लटकता झूला,

आज उसी झूले पर बैठी अतीत के पन्ने पलट रही है. अपनी माँ के उस
ख्वाहिश के बारे में सोच रही है जो वो तो कभी पूरा नहीं कर सकी, लेकिन
उसकी बेटी ने कर पूरा कर दिया. उसकी आँखे भर आई.

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