एक शाम उधार दे दो

Poems

कभी इक शाम अपनी,
हमें उधार देदो,
अकेले हैं, मिल बैठ कर
कुछ बातें कर लेंगे,
कुछ यादें ताज़ा कर लेंगे,

एक कप चाय का ही सही,
साथ बैठ कर पी लेंगे,
वैसे ही एक दूजे को देखते हुए,
वैसे ही मुस्कराते हुए आँखों में
आँखें डाल कर,

फिर जुदा हो जाएँगे, बस एक बार
अपनी इक शाम उधार देदो.

राधिका

 

 

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