असीमित कविता

Poems

मेरी लाडली
मेरे सूने जीवन में तुम आई
अपनी मासूम खिलखिलाहट से
मेरे मन आँगन में
इंद्रधनुषी रंग भर दिए

जीवन का अर्थ समझाया तुमने,
मुझे सवांरा, तुमसे ही सीखा जीना मैने

लेकिन तुम पर कोई कविता ना लिखी मैने
मै कैसे समझाउँ, कैसे बतलाउँ,

तुम खुद एक कविता हो मेरी,
एक असीमित कविता,
जिसकी कोई सीमा नही,
कोई बंधन नही,
व्यक्त करने को कोई शब्द नही

…स्वरचिता

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