अलविदा

Shayari

कोई यह बात भी लिख दे मेरे फ़साने में,
कि उनसे भी मेरी कहानी थी इक ज़माने में।

यह बात और है कि सोया नहीं हूँ अर्सों से,
लगेगा तुमको मगर इक पल सुलाने में।

ग़मे जुदाई भी झेली मगर उफ्फ तक न किया,
मिलेगा कौन तुम्हें मुझसा इस ज़माने में।

किया है दूर उसे मुझसे मेरी चाहत ने,
मगर यकीन किसे आएगा ज़माने में।

मेरी वफ़ा को शायद वो अभी नहीं समझे,
अज़ीब व्यंग सा है उसके मुस्कुराने में।

हम इम्तेहां में कायम रहे वफ़ा के साथ,
वो टूट-टूट गए मुझको आज़माने में।

तुम्हारा ज़ुल्म सलामत बस अब अलविदा,
सुकून-ए-दिल ढूंढ ही लेंगे ज़माने में।

…त्रिलोक

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