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झूला पुल बंद होने से धारचूला में फंसे 1000 नेपाली नागरिक, नहीं लौट पा रहे अपने घर

धारचूला (पिथौरागढ़)। लॉकडाउन के चलते भारत-नेपाल बार्डर पर अंतरराष्ट्रीय झूला पुल बंद होने से धारचूला और बलुवाकोट में नेपाली नागरिकों की तादात बढ़ती जा रही है। बुधवार को नेपालियों की संख्या 850 से बढ़कर एक हजार तक पहुंच गई। ये सभी अपने वतन लौटना चाहते हैं। सभी को शिविरों में रखकर भोजन कराया जा रहा है।

कोरोना के चलते भारत और नेपाल में लॉकडाउन होने से दोनों देशों को जोड़ने वाला अंतरराष्ट्रीय झूला पुल बंद हैं। भारत में मजदूरी और अन्य दूसरे काम बंद होने से यहां रह रहे नेपाली नागरिक अपने घरों को लौटने के लिए बेताब हैं, लेकिन लॉकडाउन होने से इन्हें धारचूला में ही रोक लिया गया है। बलुवाकोट से लेकर धारचूला तक इनकी तादात एक हजार तक पहुंच गई है।

नेपाल का प्रेम बहादुर पत्नी और दो बच्चों के साथ यहां पर फंसा है। सभी स्थानों पर इनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है। इनकी व्यवस्था के लिए तहसीलदार नंदन राम, नायब तहसीलदार मनीषा बिष्ट, कानूनगो भुवन लाल वर्मा नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।

झूलाघाट पहुंचे 32 नेपाली

बुधवार को बलुवाकोट राहत शिविर जीआईसी और डिग्री कॉलेज में रह रहे 371 नेपाली मजदूरों की स्क्रीनिंग डा. राकेश खाती, डा. रमेश चंद, फार्मासिस्ट, भुवन चंद्र भट्ट और राजवीर की टीम ने की। बुधवार को उपजिलाधिकारी अनिल कुमार शुक्ला ने इन राहत शिविरों में जाकर निरीक्षण किया। उन्होंने सभी नेपाली मजदूरों से कानून का पालन करने को कहा।

भारत में लॉकडाउन के बाद नेपाली नागरिकों का आना जारी है। बुधवार को भी 32 नेपाली झूलाघाट पहुंच गए। अब तक झूलाघाट में 243 नेपाली नागरिक एकत्र हो चुके हैं। थाना प्रभारी महेश चंद्र ने बताया कि प्राइमरी स्कूल गेठिगाड़ा में 56, जमिरपानी में 76, रज्यूड़ा में 19, गैंग हाउस में 30 और ग्वाली स्कूल में 62 लोगों को रखा गया है।

सभी लोेगों को राशन और बर्तन उपलब्ध कराए गए हैं। उधर बैतड़ी सांसद दामोदर भंडारी ने अमर उजाला को फोन पर मामले की जानकारी अपने देश के प्रधानमंत्री को देने की बात कही है।

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