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एक मुलाक़ात

एक मुलाक़ात

एक शाम उधार ही तो मांगी थी आपसे, वो भी देते नही बना। कब तक ऐसे मुहँ छिपाते रहेंगे। मिलना तो फिर भी पड़ेगा ही।

निवेश ने मोबाइल खोला तो उसमें विश्वा का मैसेज आया हुआ था। हल्के से मुस्कराया और मेसेज को डिलीट कर दिया।

पागल हो गयी है लड़की। ना तो उम्र का लिहाज करती है ना लोगों की।
निवेश ने सिर को हल्का सा झटका दिया और अपनी सीट पर बैठ गया।
लेपटॉप खोल कर उसमें काम करने लगा।

अचानक फिर मोबाइल के मैसेज की घण्टी बजी। निवेश ने फिर सरसरी नज़र से देखा विश्वा का ही मैसेज था

“इक सनम चाहिए आशिकी के लिए”

“पलटन बाजार चली जाओ या घण्टाघर के चौराहे पर खड़ी हो जाओ बहुत मिल जाएंगे।”


निवेश ने मेसैज का रिप्लाई किया और मुस्कराते हुए सेंड कर दिया।

“मुझे तो राजपुर रोड वाला ही चाहिए।” तुरन्त रिप्लाई आ गया।

“राजपुर रोड वाला फ्री नही है। ना ही आपके लिए अवेलेबल है। प्लीज कहीं और ट्राय मारो।” निवेश ने फिर रिप्लाई दिया। और मोबाइल को साइलेंट मोड पर कर दिया और अपना काम करने लगा।
—– —— —

हाँ भई मामला कहाँ तक पहुँचा। गरिमा ने पिज़्ज़ा बाईट लेते हुये विश्वा से पूछा।

अरे कहाँ तक क्या ? वो तो हाथ भी रखने नही देता। बात ही नही करता। आज मैंने मेसैज किया कि एक सनम चाहिए आशिक़ी के लिए तो रिप्लाई करता है कि पलटन बाजार चली जाओ या घण्टा घर के चौराहे पर खड़ी हो जाओ। यार ये भी कोई रिप्लाई है । क्या एक खूबसूरत लड़की को ऐसे रिप्लाई किया जाता है। वो मुँह बिचका कर बोली। गरिमा हँसने लगी।

तू उसके पीछे क्यों पड़ी है। जब वो तुझे भाव ही नही दे रहा है।

भाव नहीं दे रहा इस लिए तो पीछे पड़ी हूँ। वरना मुझे कमी है क्या। वो बोली।

लेकिन यार वो बुड्ढा है तेरे लिए। तुझसे काफी बड़ा है।

तो क्या। इतना बुढ्ढा भी नही। बस डैशिंग है बला का इतना ही काफी है। आई लव हिम यार। कुछ कर ना। वरना मैं मर जाऊँगी। विश्वा ने रोनी सूरत बना कर कहा तो गरिमा फिर हंसने लगी और बोली – कोई नहीं चल जुगाड़ जुगाड़ खेलते है ।

— —– ——

चलो सर आइसक्रीम खा कर आये। माजिद ने निवेश से कहा।

अरे नही। मूड नही है। निवेश बोला

क्या सर इतना प्यारा मौसम हो गया है। और आपका मूड नही है। आओ ना सर। इस मौसम में आइसक्रीम नहीं खाई तो फिर कब खाओगे।

यार तुम देहरादून वालो का मूड भी मौसम की तरह बदलता है। कभी तेज़ दोपहरी में कड़क चाय तो बारिश में कोल्ड ड्रिंक और बादलों का मौसम हो तो आइसक्रीम खाने का मन होता है। निवेश झल्लाहट के साथ बोला।

अरे सर, देहरा दून वाले ऐसे ही होते है मौसम के मूड के विपरीत ही चलते है जिससे बैलेंस बना रहे, चलो न सर।
मूड बन जायेगा। इतना कह कर माजिद निवेश को खींचकर पार्किंग की और ले गया।

लेकिन तुम यहाँ क्यों लाये। मेरी कार तो नीचे वाली पार्किंग में है। निवेश ने कहा।

सर ऐसे मौसम में बाइक या स्कूटर में मज़ा आता है। आज मैं बाइक लाया हूँ। उसी में चलेंगे। झाखन से पहले ही एक बेकरी खुली है वहाँ अच्छी आइस क्रीम मिलती है। और बैठने के लिए भी रोड के किनारे किनारे बैंच भी लगे है। बड़ा मजा आता है सर पेड़ो की छांव के नीचे बैंच में बैठकर गप्पे मारो और कुछ भी खाओ। आओ पीछे बैठो। इतना कह कर माज़िद ने बाइक स्टार्ट कर लिया। निवेश पीछे बैठ गया। और वे दोनों उड़ चले बाइक में बैठ कर।

आइस क्रीम लेकर दोनों फुटपाथ पर बने बैंच में बैठ गए जैसे ही आइस क्रीम खाना शुरू किया बारिश की बूँदे पड़ने लगी और एक मोटी सी बूंद निवेश के आइस क्रीम के ऊपर गिरी, आधी आइस क्रीम टूट कर गिर गयी। निवेश झल्ला गया और माजिद हंसने लगा।

मैं और ले आता हूँ। माजिद हंसते हुए बोला। लेकिन निवेश ने मना कर दिया। और पेड़ की ओट में खड़ा हो गया। तभी वहां से कुछ बाइक, स्कूटर तेज़ स्पीड से शोर मचाते हुए निकले जिनमे लड़के और लड़कियां थे, और जो पीछे बैठे थे वे हाथ फैलाये बारिश का मज़ा ले रहे थे।  हाथों में कोल्ड ड्रिंक की छोटी बड़ी बॉटल्स थी।

यार तुम देहरादून वाले इतने क्रेजी क्यों हो बारिश के भीगने के लिए। निवेश ने उनको देख कर कहा।

सर हम ऐसे ही होते है। बारिश ही नही सर्दियों का भी मज़ा लेते है। सर्दियों में जैसे ही बारिश शुरू होती है हम लोग अंदाजा लगा लेते है कि अब मसूरी और उसके आस पास स्नो फॉल होने वाला है और हम लोग उसी बारिश में निकल पड़ते है मसूरी। और वहाँ स्नो फॉल का मज़ा लेते है। वहाँ जाके अगर भुट्टे ना खाएं तो एन्जॉयमेंट आधा ही रह जाता है। इसलिए मसूरी में 12 महीने भुट्टे मिलते है ताकि हम फूल एन्जॉयमेंट कर सके। देखा न आपने प्रकृति भी हमारा साथ देती है। माज़िद ने हंस कर  कहा।

पागल हो तुम लोग। निवेश बोला और चौंक गया। सामने बारिश में भीगती विश्वा और गरिमा स्कूटी से उतर कर उन्हीं की तरफ आ रहे थे।

उफ्फ ये पागल लड़की भी यहीं आगयी। निवेश बड़बड़ाया। माज़िद ने तिरछी नज़र से उसे देखा और मुस्कराया फिर गरिमा और विश्वा की तरफ देख कर एक आँख दबा दी।

हाय क्या खूबसूरत मौसम है। है ना सर। विश्वा ने निवेश की ओर देख कर कहा।

बीमार हो जाओगी तो पता चलेगा मौसम कितना खूबसूरत है। निवेश ने कहा। पूरी तरह से भीग गयी हो कुछ ध्यान भी है के नहीं?

सर आप भी भीगो ना। बड़ा अच्छा लगेगा आपको।  इतना कह कर विश्वा ने निवेश का हाथ पकड़ कर खींचा निवेश सम्भल नही पाया और विश्वा के साथ खिंचता चला गया और बारिश में भीग गया।

व्हाट नॉनसेंस! निवेश गुस्से में बोला।

एन्जॉय सर्। विश्वा उसका हाथ पकड़े ही गोल गोल घूम गयी, निवेश का गुस्सा कुछ काम ना आया।

तभी आइस क्रीम की ठेली आ गयी कुछ और लोग रुके हुए थे वहां वो आइस क्रीम लेने लगे तो विश्वा भी मचल उठी – सर आइस क्रीम!

नो आइस क्रीम। निवेश बोला और अपने आप को विश्वा की पकड़ से मुक्त कर के वापस माज़िद के पास आ गया। विश्वा ने घूर के देखा निवेश को फिर आईस क्रीम की ठेली के पास चली गयी और चार आइस क्रीम ले के आ गयी। एक गरिमा को एक माज़िद को देके खुद भी खाने लगी।

अरे सर को नही दिया। गरिमा बोली।
तेरे सर आइस क्रीम नही बल्कि गुस्सा खाते है हर वक़्त। उसने जवाब दिया। लेकिन माज़िद ने उसके हाथ से एक आइस क्रीम लेके निवेश को पकड़ाया और कहा – ले लो सर प्लीज एन्जॉय। निवेश ने चुपचाप आइस क्रीम ली और खाने लगा।
——

थैंक यू माज़िद सर को वहाँ तक लाने के लिए। गरिमा ने कहा।

माज़िद ने मुस्करा कर सिर हिलाया।

यार तुम्हारा सर इतना भाव क्यों खाता है विश्वा बोली।

भई शरीफ इंसान है। और…..

और आगे कुछ नही सुनना। उसको बोलो मेरे से मिले।

बस एक मुलाकात करा दो मेरे सनम से, जिंदगी खूबसूरत हो जाएगी कसम से। विश्वा बड़े रोमांटिक अंदाज़ में बोली। माज़िद और गरिमा हंस पड़े।
…. ……. ……

सर ये विश्वा …… माज़िद ने बात आधी छोड़ दी।

क्या विश्वा!! निवेश ने सिर ऊपर उठाया और पूछा।

आपको तंग क्यों करती रहती है। मेरा कहने का मतलब है।

अरे यार छोटी बच्ची है। नासमझ है।बस सामने जो दिख रहा है वही अच्छा लग जाता है और उसके पीछे पड़ जाती है। जब से आया हूँ तभी से देख रहा हूँ। पहले तो कुछ कहती नही थी सिर्फ देखती रहती थी। एक दिन लिफ्ट में अकेले फंस गए हम दोनों। डर के मारे मेरे करीब आगयी। मैंने उसको हिम्मत देने के लिए उसके सिर पर हाथ फेरा, और डरो मत कहा। वो तो मेरे बिल्कुल करीब आगयी मेरा हाथ पकड़ कर मेरे सीने से लग कर बच्चों की तरह चिपक गयी। बस उसी दिन से, मैं तो अब बहुत परेशान हो गया हूँ।

लेकिन सर वो आपको बहुत लाइक करती है। एक बार ठीक से बात कर लेते तो….. बेचारी परेशान हो रही थी।

तुम उसकी पैरवी करने आये हो?  निवेश ने माज़िद की तरफ देखा।

अरे सर!  मैं तो बस… सर…..सर…  माज़िद से कुछ कहते न बना।

देखो माज़िद मैं उससे उम्र में बहुत बड़ा हूँ। बाहर से आया हूँ कमाने के लिए। ना कि आशिक़ी करने के लिए। उसको समझाओ। अपनी हमउम्र का कोई लड़का ढूंढ ले।

लेकिन सर वो नही मानेगी। आप एक बार उससे मिल लो सर प्लीज और अपने हिसाब से समझा दो। शायद समझ जाएं।

ठीक है, मिल लेते है, बोलो कब और कहाँ। निवेश ने हथियार डाल दिये।

वो तो मैं उससे ही पूछ कर बताता हूँ।
माज़िद ने कहा।

ठीक है जाओ उनको इन्फॉर्म कर दो और अपना काम करो ।
……… ……….

माज़िद और गरिमा चुपचाप बैठे विश्वा को देख रहे थे, और विश्वा सातवें आसमान में उड़ रही थी। दोनों हाथ हवा में फैलाए गोल गोल घूम रही थी।

यो…….यो……. आई वोन….. आई वोन ….. हा … हा…… खुशी से नाच रही थी।

अरे ओ महारानी जमीन पर आजा।
गरिमा ने टोका उसको। और बता कहां मिलेगी निवेश सर को। क्या बोलेगी।

तुम दोनों मिल कर सेट करो और मुझे इन्फॉर्म कर दो। सिर झटक कर बड़े ही अंदाज़ से बोली और कुशन को अपने बाहों में दबोच कर गाने लगी –

इक मुलाक़ात जरूरी है सनम,
जिंदा रहने के लिए तेरी कसम।।
ह्म्म्म ….. हम्म्म्म …..हम्म्म्म …..

……. …… …….

डूबता हुआ सूरज और चारों तरफ फैली उसकी लालिमा एक खूबसूरत रोमान्टिक समां का आभास दे रही थी। ऐसे में विश्वा और निवेश दोनों आमने सामने बैठे एक दूसरे को देख रहे थे। विश्वा उन लोगों में से नही थी कि जरा जरा सी बातों में शर्मा जाए। कोई झिझक महसूस करे। बेहिचक बात करने वाली थी। वहीं निवेश के अंदर झिझक भरी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या बात करे। उसकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये थी कि वो चालीस साल का था और विश्वा शायद बीस साल। ये गैप ही इतना ज्यादा था कि वो आगे कुछ सोच ना पाता। उसने गला खंखार कर कहना शुरू किया।

विश्वा तुम एक अच्छी, पढ़ी लिखी, समझदार लड़की हो। तुम्हें चाहिए कि तुम अपने किसी हमउम्र लड़के के संग दोस्ती करो।

क्यों मैं किसी और के संग करू दोस्ती। जबकि मैं आपको चाहती हूँ।
उसने जवाब दिया।

तुम समझ नही रही हो। मैं……

तो वही समझाइये ना। क्यों बात घूमा रहे है। उसकी बात काट कर बोली।

सबसे पहली बात मैं तुमसे उम्र में बहुत बड़ा हूँ।

देखिए मैं चौबीस साल की हूँ अगले साल पच्चीस की हो जाऊंगी। लम्बी हूँ, खूबसूरत हूँ, अडल्ट हूँ, मैं अपना भला बुरा समझती हूँ। मैं कोई बच्ची नहीं हूँ जिसे हाथ में कोई खिलौना दे के बहलाया जाए। मानते है इस बात को?

हम्म!अगले साल तो मैं भी 41 का हो जाऊंगा  इतना बोल कर निवेश चुप हो गया।

बोलिये मैने सही कहा या गलत।
विश्वा ने फिर पूछा।

क्या कहूँ। निवेश ने अपने दोनों हाथ जोड़ने की मुद्रा में कर दिए और अपने होंठों से सटा लिए।

आप कुछ मत कहिये। सिर्फ सुनिए
इतना कह कर वो उठी और उठ कर निवेश के करीब आ गयी, अपने दोनों हाथों से निवेश का चेहरा थाम लिया और उनके होठों को चूम कर बोली – अब हम दोनों दो नही सिर्फ एक है। ज्यादा मत सोचिए। मेरे हमसफ़र बन जाईये आप। मैं सिर्फ दोस्त बन कर नही रहना चाहती , आपकी जिंदगी में शामिल होना चाहती हूं। कुछ मत सोचिए। मेरा परिवार, आपका परिवार क्या कहेगा, समाज क्या कहेगा। छोड़ दीजिए मुझपर, आप सिर्फ हाँ बोलिये। इतना कह कर उसने फिर निवेश के होठों को चूम लिया।

उफ्फ तुम तो महाजिद्दी हो।  वह बोला। और उठ खड़ा हुआ अपनी सीट से वापस जाने के लिए, लेकिन  उसके उठते ही विश्वा भी एकदम उठी और  उसे अपनी बाहों में भर लिया। निवेश कुछ देर चुप खड़ा रहा फिर उसने भी उसको अपनी बाहों में भर कर अपनी स्वीकृति की मुहर लगा दी।

इति
रचना मौलिक है।
राधा गौरांग (राधिका)

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