kyo lagtey ho ajnabee se

क्यों लगते हो अजनबी से

Poems Treasure House

क्यों लगते हो अजनबी से,
जबकि तुम मेरे अपने हो।
क्यों नज़र आते हो दूर , जबकि
पास मेरे रहते हो।
तुम्हें चाहा बड़ी शिद्दत से,
लेकिन तुम्हारी चाहत पाने को तरसते रहे,
तुम मेरे अपने बन तो गए
पर क्यों अजनबी से लगते हो?

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