कल आएगा सबरीमाला और राफेल मामले पर फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला और राफेल मामले पर दायर पुनर्विचार याचिका पर गुरुवार को फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील की जांच कराने की मांग वाली पुनर्विचार याचिकाओं पर मई में ही सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं, सबरीमाला स्थित अयप्पा मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका परफरवरी में फैसला सुरक्षित रखा था।

सीजेआई गोगोई के कार्यकाल में बुधवार के बाद दो दिन (14 और 15 नवंबर) ही कामकाज के लिए बचे हैं,शनिवार कोकोर्ट में छुट्टी है। इसके बाद 18 नवंबर को जस्टिस एसए बोबडे नए मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। चीफ जस्टिस ने पहले ही कहा था कि वे अपने रिटायरमेंट से पहले अयोध्या समेत कई अहम मामलों में फैसला सुना देंगे। जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही पिछले हफ्ते अयोध्या मामले में फैसला सुनाया था।

सबरीमाला-राफेल मामलों में कौन सी बेंच देंगी फैसला?
सबरीमाला मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ सुबह 10:30 बजे फैसला सुनाएगी। इस बेंच में सीजेआई के साथ जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं। इसके अलावा राफेल मामले की जांच के लिए दायर पुनर्विचार याचिका पर सीजेआई गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ फैसला सुनाएंगे।

सबरीमाला पर कोर्ट ने कहा था- पितृसत्ता के नाम पर समानता से खिलवाड़ की छूट नहीं
28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4-1 के बहुमत से इस पर फैसला सुनाया। कहा कि सबरीमाला में महिलाओं को गैर-धार्मिक कारणों से प्रतिबंधित किया गया है, जो सदियों से जारी भेदभाव है। पितृसत्ता के नाम पर समानता के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पीरियड्स की आड़ लेकर लगाई गई पाबंदी महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है। संविधान पीठ में शामिल एकमात्र महिला जस्टिस इंदु मल्होत्रा का फैसला बाकी 4 जजों के विपरीत था। उन्होंने कहा था कि सती जैसी सामाजिक कुरीतियों से इतर यह तय करना अदालत का काम नहीं है कि कौन सी धार्मिक परंपराएं खत्म की जाएं।

राफेल मामले में लीक दस्तावेजों के आधार पर दायर हुई पुनर्विचार याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 के फैसले में राफेल डील को तय प्रक्रिया के तहत होना बताया था। अदालत ने उस वक्त डील को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हालांकि, इसी साल कुछ गोपनीय दस्तावेज लीक होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने डील के दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने मूल दस्तावेजों की फोटकॉपी का इस्तेमाल किया है। धारा 123 के तहत विशेषाधिकार वाले गोपनीय दस्तावेजों को पुनर्विचार याचिका का आधार नहीं बनाया जा सकता।

Leave a Reply