हिसाब नाकामियों का

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मत पूछो मेरी नाकामियों का हिसाब,
बस इतना समझ लो
के तुम न आते मेरी जिंदगी में,
जिंदगी का ये हाल न होता।

लोग अब भी किया करते है
जिक्र तुम्हारा,
और चेहरे पे मेरे,
टिका लेते है निगाहें,
क्या अब भी पूछोगे हाल मेरा?

बस अब तो कट ही गया है
सफर , कभी हिसाब नहीं मांगा
नाकामियों से अपनी,

मेरे हिस्से जो भी आया,
खुशी से उसको सीने से लगाया,
और मेरी नाकामियों ने मुझे
फर्श से अर्श तक पहुँचा दिया।

राधिका

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