गोपी आंटी की समस्या

क्या हो गया गोपी आंटी….क्यों इतना परेशान है आप?  क्यों बड़बड़ा रही है अकेले-अकेले? रोज की तरह कृष्णा मॉर्निंग वॉक जाते हुए गोपी आंटी को बड़े से आंगन बुहारते  देखकर बोली। अरे तुम्हें क्या बताऊं अपनी कहानी अपनी परेशानी  ……मैं तो बहुत परेशान हो गई हूं। गोपी आंटी ने अपनी धोती के पल्लू से अपना […]

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एक मुलाक़ात

एक मुलाक़ात एक शाम उधार ही तो मांगी थी आपसे, वो भी देते नही बना। कब तक ऐसे मुहँ छिपाते रहेंगे। मिलना तो फिर भी पड़ेगा ही। निवेश ने मोबाइल खोला तो उसमें विश्वा का मैसेज आया हुआ था। हल्के से मुस्कराया और मेसेज को डिलीट कर दिया। पागल हो गयी है लड़की। ना तो […]

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किसान की पहली बारिश

आधा असाढ़ का महीना गुजर गया था लेकिन बारिश न होने की वजह से गाँव के सभी किसान परेशान थे। जिनके खेतों में नहर का पानी आता था उनके खेतों में तो धान की पौधों की रोपाई हो गयी थी लेकिन किशना, राधे, लालू आदि छोटे किसानों के खेत जुते हुए हैं मगर धान की […]

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पड़ोस वाले भैया से प्यार

प्रेम नगर के 3 विंग के मोहल्ले में रहते थे। उम्र कोई 12 – 13 साल की, पांच सहेलियों के ग्रुप था। पांचों एक ही क्लास में पढ़ती। तब प्यार क्या होता है किसी को भी मालूम नहीं था। मोहल्ले के सभी बड़े लड़के भाई जी या भैया जी होते थे, बड़ी लड़किया दीदी और […]

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Almora, Uttranchal, India

आहा अलमोड़ा

अल्मोड़ा मेरा सपनों का शहर है। बचपन से गुलशन नंदा और रानू के उपन्यास को पढ़ती आयी थी। उनके उपन्यास में अधिकतर अल्मोड़ा, नैनीताल का जिक्र रहता था। 10वीं पढ़ते-पढ़ते गुलशन नन्दा के उपन्यास “कटी पतंग” को पढ़ने का अवसर मिला। अल्मोड़ा और नैनीताल की वादियों में रचा बसा कटी पतंग के ऊपर फिर फ़िल्म […]

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13 जुलाई

आज 13 जुलाई है हमारी शादी की सालगिरह, ऊह शादी की सालगिरह या मेरी जिंदगी का अभिशाप यह कह कर उर्मि ने अपनी गर्दन को झटक दिया और अपनी साड़ी के पल्लू को कमर में खोंस कर कैलेंडर की तरफ बढ़ी और पन्ना पलट दिया और किचन की तरफ बढ़ गई। गैस पर चाय का […]

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देखे और सोचे

आज दो घटनाओं ने मुझे बुरी तरह से झकझोर दिया। प्रथम बोझ उठा कर जाते हुए 70 साल के वृद्ध को देख कर और दूसरा गाड़ी में सीट न मिलने पर गाड़ी के पीछे लटक कर जाते हुए वृद्ध को देख कर। मेरे महान भारत में आज भी इस तरह जीने को मजबूर भारत की […]

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Shyam Babu Part 2 RadhikaSpeaks.com

शाम बाबू – पार्ट 2

आज तो शाम बाबू बहुत ही खुश है। हो भी क्यों ना ? आज उनके घर की पुताई हो रही थी। बेचारे जब तक जिंदा रहे, हर तरह से जुगाड़ करने की कोशिश करते रहे कि किसी तरह से घर की पुताई हो जाये, लेकिन जैसे ही पैसों का जुगाड़ होता वैसे ही कोई न […]

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treadmill from RadhikaSpeaks.com

ट्रेड मिल

इतनी मोटी भी नहीं थी, वजन ५७ किलो ही था फिर भी पतली छरहरी होने का शौक इतना कि आए दिन कोई ना कोई प्लान बनता कुछ दिन अमल में आता फिर टूट जाता. कुछ दिन बार फिर प्लान बनता. प्लान भी शुरू खाने से होता, रोज समोसा नहीं खाना, सात दिन में एक बार […]

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ख्वाहिश छोटी सी

एक ख्वाहिश थी माँ की कि उसकी बेटी के पास एक छोटा सा घर हो, एक छोटा सा आँगन, एक कोने में गुल्मोहर का पेड़ उसकी शाख पर झूला , बादलों से छनती मुठ्ठी भर धूप उस आँगन में हो. लेकिन उसकी बिटिया के पास उच्च शिक्षा और हुनर तो था लेकिन धन का अभाव […]

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