treadmill from RadhikaSpeaks.com

ट्रेड मिल

इतनी मोटी भी नहीं थी, वजन ५७ किलो ही था फिर भी पतली छरहरी होने का शौक इतना कि आए दिन कोई ना कोई प्लान बनता कुछ दिन अमल में आता फिर टूट जाता. कुछ दिन बार फिर प्लान बनता. प्लान भी शुरू खाने से होता, रोज समोसा नहीं खाना, सात दिन में एक बार […]

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ख्वाहिश छोटी सी

एक ख्वाहिश थी माँ की कि उसकी बेटी के पास एक छोटा सा घर हो, एक छोटा सा आँगन, एक कोने में गुल्मोहर का पेड़ उसकी शाख पर झूला , बादलों से छनती मुठ्ठी भर धूप उस आँगन में हो. लेकिन उसकी बिटिया के पास उच्च शिक्षा और हुनर तो था लेकिन धन का अभाव […]

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चंदामामा

आओ रे आओ चंदामामा बहुत साल हुए तुम्हारे पूड़े खाए हुए, याद है तुमको तुम थाली में खाते थे और हमको प्याली में देते थे,प्याली हमसे टूट जाती थी और आप रूठ जाते थे. याद है ना. अरे हाँ बहुत साल हुए आपने भी तो अपनी अम्मा से ऊन का झंगोला नहीं माँगा लगता है […]

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क्रेडिट

नंदना की अपनी भाभी से बिल्कुल नहीं बनती थी, कई सालों से बोलचाल भी नहीं थी, फिर भी वो उनके बड़े बेटे की पढ़ाई के खर्चे का जिम्मा बड़ी संजीदगी से निभा रही थी1 शहर के सबसे अच्छे पब्लिक स्कूल में उसको डाला हुआ था1 बच्चा पढ़ने में अच्छा था सो लगातार नंदना की मेहनत […]

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