एक मुलाक़ात

एक मुलाक़ात एक शाम उधार ही तो मांगी थी आपसे, वो भी देते नही बना। कब तक ऐसे मुहँ छिपाते रहेंगे। मिलना तो फिर भी पड़ेगा ही। निवेश ने मोबाइल खोला तो उसमें विश्वा का मैसेज आया हुआ था। हल्के से मुस्कराया और मेसेज को डिलीट कर दिया। पागल हो गयी है लड़की। ना तो […]

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Almora, Uttranchal, India

आहा अलमोड़ा

अल्मोड़ा मेरा सपनों का शहर है। बचपन से गुलशन नंदा और रानू के उपन्यास को पढ़ती आयी थी। उनके उपन्यास में अधिकतर अल्मोड़ा, नैनीताल का जिक्र रहता था। 10वीं पढ़ते-पढ़ते गुलशन नन्दा के उपन्यास “कटी पतंग” को पढ़ने का अवसर मिला। अल्मोड़ा और नैनीताल की वादियों में रचा बसा कटी पतंग के ऊपर फिर फ़िल्म […]

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13 जुलाई

आज 13 जुलाई है हमारी शादी की सालगिरह, ऊह शादी की सालगिरह या मेरी जिंदगी का अभिशाप यह कह कर उर्मि ने अपनी गर्दन को झटक दिया और अपनी साड़ी के पल्लू को कमर में खोंस कर कैलेंडर की तरफ बढ़ी और पन्ना पलट दिया और किचन की तरफ बढ़ गई। गैस पर चाय का […]

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देखे और सोचे

आज दो घटनाओं ने मुझे बुरी तरह से झकझोर दिया। प्रथम बोझ उठा कर जाते हुए 70 साल के वृद्ध को देख कर और दूसरा गाड़ी में सीट न मिलने पर गाड़ी के पीछे लटक कर जाते हुए वृद्ध को देख कर। मेरे महान भारत में आज भी इस तरह जीने को मजबूर भारत की […]

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क्लीन चिट

उदास निगाहें पथरा गयी उस माँ की, जिसकी मासूम और नाबालिग बेटी की अस्मत पे हाथ डाला था जिस आदमी ने , उसको क्लीन चिट दे दी गयी सरकार की तरफ से । अब कोई उम्मीद नहीं न्याय की , घुट घुट कर जियेंगी माँ बेटी जिंदगी भर, दिल पर रखे पहाड़ सा ये बोझ।

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Modern Friendship - RadhikaSpeaks.com

आधुनिक दोस्ती

बचपन की सखियों के संग खेलना, रूठना, मनाना। कुछ भी खाने का सामान बन्दर की तरह बांट कर खाना। खेल के मैदान में एकाएक खेल रोक कर तितलियों के पीछे भागना। कभी क्लास रूम में पीछे से आगे वाली सहेली की चुटिया खींचना कभी उसकी कुर्सी से दुपट्टा बांध देना। गर्मियों की दुपहरी में कच्चे […]

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Milan Chowk, a short story by RadhikaSpeaks.com

मिलन चौक

पूरे देश में डेवलेपमेंट की लहर चल रही है, हर तरफ चाहे शहर हो या गाव इसकी चपेट में आया हुआ है. सबके रूप बदल रहे हैं, शहरों में माल, सुपर बाज़ार, बिग बाज़ार खुल गये हैं, गाव भी अछूते नहीं रहे, लहलहाते हुए खेत भी प्लॉटिंग के रूप ले रहे है, उन पर कोठियाँ, […]

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Dhalti Umr ki Shaam - ek khoobsoorat lekh. RadhikaSpeaks.com se

ढलती उम्र की शाम

उम्र की दहलीज़ पर, सांझ की आहट हो चुकी है, ख्वाहिशें थम जाती है, और सुकून की तलाश बढ़ जाती है. उक्त शेर को पढ़ कर मैं खुद एक गहन सोच में पड़ गयी. मेरे भी उम्र की दहलीज़ पर सांझ का आगमन हो गया है और सांझ के साए में ही जी रही हूँ. […]

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सास की कलम से

कल शाम फेसबुक में एक पोस्ट Momspresso में आधुनिका चौधरी का ब्लॉग :- क्या बेटा बहू साथ ना घूमें. में काफ़ी सारे कॉमेंट्स पढ़ने को मिले, लगभग हर कॉमेंट में सास को लेकर ही शिकायतें थी. वैसे तो ये हर घर की कहानी है. चाहे सास पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ या कम पढ़ी लिखी […]

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