आहा अलमोड़ा

अल्मोड़ा मेरा सपनों का शहर है। बचपन से गुलशन नंदा और रानू के उपन्यास को पढ़ती आयी थी। उनके उपन्यास में अधिकतर अल्मोड़ा, नैनीताल का जिक्र रहता था। 10वीं पढ़ते-पढ़ते...

13 जुलाई

आज 13 जुलाई है हमारी शादी की सालगिरह, ऊह शादी की सालगिरह या मेरी जिंदगी का अभिशाप यह कह कर उर्मि ने अपनी गर्दन को झटक दिया और अपनी साड़ी...

क्लीन चिट

उदास निगाहें पथरा गयी उस माँ की, जिसकी मासूम और नाबालिग बेटी की अस्मत पे हाथ डाला था जिस आदमी ने , उसको क्लीन चिट दे दी गयी सरकार की...

आधुनिक दोस्ती

बचपन की सखियों के संग खेलना, रूठना, मनाना। कुछ भी खाने का सामान बन्दर की तरह बांट कर खाना। खेल के मैदान में एकाएक खेल रोक कर तितलियों के पीछे...

मिलन चौक

पूरे देश में डेवलेपमेंट की लहर चल रही है, हर तरफ चाहे शहर हो या गाव इसकी चपेट में आया हुआ है. सबके रूप बदल रहे हैं, शहरों में माल,...

ढलती उम्र की शाम

उम्र की दहलीज़ पर, सांझ की आहट हो चुकी है, ख्वाहिशें थम जाती है, और सुकून की तलाश बढ़ जाती है. उक्त शेर को पढ़ कर मैं खुद एक गहन...

सास की कलम से

कल शाम फेसबुक में एक पोस्ट Momspresso में आधुनिका चौधरी का ब्लॉग :- क्या बेटा बहू साथ ना घूमें. में काफ़ी सारे कॉमेंट्स पढ़ने को मिले, लगभग हर कॉमेंट में...

जिंदगी

उलझी और बॅल्झी हुई सी जिंदगी, उन आधे अधूरे ख्वाब सी, जो कभी पूरी नहीं हो सकीं उन आधे अधपढ़े किताबों सी, जो तकिये के नीचे या फिर साइड टेबल...
Close