बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती को अर्पित करें पीले फूल

News Room Uttrakhand

देहरादून। सरस्वती पूजन इस साल दो दिन मनाया जा रहा है। इसकी वजह यह है कि माघ शुक्ल पंचमी यानी बसंत पंचमी 2 दिन यानी 9 और 10 फरवरी को मनायी जा रही है। यह कहना है अखिल भारतीय हिन्दू क्रांतिदल के उत्तराखण्ड प्रदेश मीडिया प्रभारी सचिन जैन का। उन्होंने समस्त देशवासियों को सरस्वती पूजा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश के कुछ भागों में चतुर्थी तिथि 9 तारीख को दोपहर से पहले ही समाप्त हो जा रही है और पंचमी तिथि शुरू हो रही है जबकि 10 तारीख को पंचमी तिथि 2 बजकर 9 मिनट तक रहेगी।

सचिन जैन ने कहा कि पंचांग की गणना के अनुसार देश के उत्तर पश्चिमी भागों में 9 फरवरी को पूर्वाह्न के पूर्व पंचमी आरंभ हो जाने से यहां सरस्वती पूजन 9 तारीख को करना शास्त्रानुकूल रहेगा। जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में यह पर्व 10 फरवरी को मनाया जाना शास्त्र के अनुकूल रहेगा। उन्होंने बसंत पंचमी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वसंत को ऋतुओं यानी मौसमों का राजा कहा जाता है। इसे प्यार का मौसम भी कहते हैं, क्योंकि धरती इस मौसम में खूबसूरत फूलों का श्रंगार करती है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में कई उत्सव मनाने का भी रिवाज है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है और बच्चों की पढ़ाई का आरंभ भी किया जाता है। आन्ध्र प्रदेश में इसे विद्यारंभ पर्व कहते हैं। यहां के बासर सरस्वती मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

सचिन जैन ने कहा कि वसंत पंचमी पर विद्या और बुद्धि की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जाएगी। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पारंपरिक रूप से देश के कई हिस्सों में इस दिन बच्‍चे को प्रथमाक्षर यानी पहला शब्‍द लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है।

सचिन जैन ने कहा कि हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई है। इसीलिए उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। यह दिन बसंत पंचमी का था। इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है।

उन्होंने मां सरस्वती की पूजा विधि का जिक्र करते हुए कहा कि मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। इसके साथ ही पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें, और बच्चों को पूजा में शामिल करें। उन्होंने कहा कि इस दिन पीले कपड़े पहनना शुभ माना जाता है, पूजा के वक्त या फिर पूरे दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें। सचिन जैन ने कहा कि इस दिन बच्चों को पुस्तकें तोहफे में दें तथा पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।

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