शाम बाबू – पार्ट 2

आज तो शाम बाबू बहुत ही खुश है। हो भी क्यों ना ? आज उनके घर की पुताई हो रही थी। बेचारे जब तक जिंदा रहे, हर तरह से जुगाड़ करने की कोशिश करते रहे कि किसी तरह से घर की पुताई हो जाये, लेकिन जैसे ही पैसों का जुगाड़ होता वैसे ही कोई न […]

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हिसाब नाकामियों का

मत पूछो मेरी नाकामियों का हिसाब, बस इतना समझ लो के तुम न आते मेरी जिंदगी में, जिंदगी का ये हाल न होता। लोग अब भी किया करते है जिक्र तुम्हारा, और चेहरे पे मेरे, टिका लेते है निगाहें, क्या अब भी पूछोगे हाल मेरा? बस अब तो कट ही गया है सफर , कभी […]

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kyo lagtey ho ajnabee se

क्यों लगते हो अजनबी से

क्यों लगते हो अजनबी से, जबकि तुम मेरे अपने हो। क्यों नज़र आते हो दूर , जबकि पास मेरे रहते हो। तुम्हें चाहा बड़ी शिद्दत से, लेकिन तुम्हारी चाहत पाने को तरसते रहे, तुम मेरे अपने बन तो गए पर क्यों अजनबी से लगते हो?

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Aaya Mausam Faagh Ka

आया मौसम फाग का

बहुत हुआ ये घोर चुप, अब तो कुछ बोल दो, आया मौसम फाग का, अँखियों से ही कुछ रंग घोल दो, ना लगो गले हमसे, ना सही, तिरछी नज़रों से ही देख लो, सतरंगी हो जाएगा मौसम, एक बार मुस्करा के कुछ बोल दो. 

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Milan Chowk, a short story by RadhikaSpeaks.com

मिलन चौक

पूरे देश में डेवलेपमेंट की लहर चल रही है, हर तरफ चाहे शहर हो या गाव इसकी चपेट में आया हुआ है. सबके रूप बदल रहे हैं, शहरों में माल, सुपर बाज़ार, बिग बाज़ार खुल गये हैं, गाव भी अछूते नहीं रहे, लहलहाते हुए खेत भी प्लॉटिंग के रूप ले रहे है, उन पर कोठियाँ, […]

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एक शाम उधार दे दो

कभी इक शाम अपनी, हमें उधार देदो, अकेले हैं, मिल बैठ कर कुछ बातें कर लेंगे, कुछ यादें ताज़ा कर लेंगे, एक कप चाय का ही सही, साथ बैठ कर पी लेंगे, वैसे ही एक दूजे को देखते हुए, वैसे ही मुस्कराते हुए आँखों में आँखें डाल कर, फिर जुदा हो जाएँगे, बस एक बार […]

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भू-कम्प

पृथ्वी के सीने में ज़ोर का दर्द उठा, वह दर्द से तड़पने लगी, करवट पे करवट बदलने लगी, वह कहलाया भू-कम्प. हज़ारों घर हुए बर्बाद, खेत खलिहान ढह गये, लाखों हुए बेघर, चारो तरफ हुई तबाही. दोषी ठहराया गया भू – कम्प सबने कहा- भूकंप ना आता, तो ना होती तबाही, ना कोई बेघर होता, […]

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निशान कदमों के

रेत पर निशान यूँ कदमों के ना छोड़ते चलो, इक दिन कोई लहर आएगी निशान मिटा के चली जाएगी छोड़ना ही है अगर निशान तो किसी चट्टान पे छोड़ो, जिसे कोई मिटा नहीं पाएगा. राधिका

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यूँ ही

बस कह दिए, बड़े मजबूत हो तुम, ऐसे ही रहना, कांधा थपथपा के चल दिए, सिक्के के एक ही पहलू को देख खुश हो लिए. किसी ने ज़रा सा भी ना पूछा कैसे जी रहे हो तुम, क्या कर रहे हो तुम, क्या दुख है तुम्हें जो ऐसे मुस्करा रहे हो तुम. राधिका

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