नेकी

Poems

सुना था कभी
बुज़ुर्गो से, नेकी कर
दरिया में डाल

हमनें भी नेकी करी,
एक नहीं अनेक
और डाल दिया
दरिया में,

एक दिन सोचा
देखें तो ज़रा,
दरिया में
नेकी का हाल,
खूब फल फूल गयी
होगी अब तो,
अरे ये क्या
इसमे तो घड़ियाल ही
घड़ियाल झाँक रहे हैं,

नेकी करके दरिया में
डालना कोई गुनाह
हैं क्या आज???

Leave a Reply