Dil se Short Stories

13 जुलाई

आज 13 जुलाई है हमारी शादी की सालगिरह, ऊह शादी की सालगिरह या मेरी जिंदगी का अभिशाप यह कह कर उर्मि ने अपनी गर्दन को झटक दिया और अपनी साड़ी के पल्लू को कमर में खोंस कर कैलेंडर की तरफ बढ़ी और पन्ना पलट दिया और किचन की तरफ बढ़ गई। गैस पर चाय का पैन चढ़ा दिया और बेटे को आवाज देने लगी । मां मैं तैयार हो गया हूँ। आप तैयार हो कि नही। ओह उर्मि तो भूल गयी थी कि उसको बेटे के संग मॉल जाना है। उसने चाय का पैन गैस से उतारा और गैस बंद कर दिया । बड़बड़ाते हुए बाथरूम की तरफ बढ़ गयी। नहाते वक्त भी 13 जुलाई उसके दिमाग में घुस कर उसके विचारों में उथल पुथल मचा रहा था। रह रह कर प्रवीण का चेहरा सामने आ रहा था। प्रवीण और उर्मि का प्रेम विवाह था। घर वालों की सहमति से 13 जुलाई को उन दोनों की शादी हुई। एक बेटा हुआ । धीरे धीरे दोनो में अनबन होने लगी। और अंत में दोनों में तलाक हो गया। उर्मि का बेटा अब 15 साल का हो गया था। नाइन्थ ग्रेड में पढ़ रहा था। खुद अपना एक बुटीक खोल लिया था जिससे उसका और बेटे का खर्चा चल जाता था। बेटे को लेके वो मॉल पहुँच गयी जैसे ही एस्कलेटर की तरफ बढ़ी एकाएक चौंक कर रुक गयी सामने प्रवीण किसी स्त्री के हाथ में हाथ डाले किसी बात पे हंस रहा था, उसने भी उर्मि को देखा और हंसते हंसते रुक गया। हैलो …. प्रवीण एक कदम आगे आया और उर्मि से बोला। हाय … उर्मि ने कहा । ये मेरी धर्मपत्नी सरिता । सरिता ये उर्मि , मैंने तुमको बताया था ना । एक बेटा भी है पलाश, ये है सामने। हाय पलाश इतना कह कर उसने पलाश को अपने बगल में सटा लिया। पलाश मुस्कराया। और अपने पापा से लिपट गया। आज हमारी शादी की सालगिरह है इसलिये सरिता के लिए गिफ्ट खरीदने आये थे। प्रवीण बोला। 13 जुलाई को ? उर्मि ने प्रश्नवाचक नज़रों से प्रवीण को देखा। हाँ 13 जुलाई । मेरे लिए 13 जुलाई एक उत्सव का समय रहा है हमेशा। वो जुलाई के महीना ही था जब मुझे मेरा पहला प्यार मिला था। पहली शादी 13 जुलाई को हुई थी। मेरा बेटा जुलाई के महीने में पैदा हुआ । मैं कैसे भूल सकता था जुलाई का महीना और 13 तारीख। इतना कह कर उसने उर्मि को गहरी नज़र से देखा। और शायद बिछड़े भी जुलाई के महीने में ही थे, उर्मि का गला भर्रा गया। उसने कभी सोचा ही न था कि 13 जुलाई कभी किसी के लिए इतना खूबसूरत हो सकता है कि उसको एक उत्सव की तरह मान कर आत्मसात कर लेता है। और एक वो खुद है कि 13 जुलाई को अपने जीवन के लिए एक अभिशाप मान कर बैठी है। 13 जुलाई तो क्या जुलाई शुरू होते ही वो डिस्प्रेशन में पहुँच जाती है और फिर पूरा महीना वैसे ही उदास परेशान रहती है। 13 जुलाई का दिन उसको बड़ा भारी महसूस होता है। क्या हुआ? प्रवीण ने पूछा। कितनी आसानी से तुमने कह दिया कि 13 जुलाई तुम्हारे लिए उत्सव का दिन है। वो मुस्कराई। हाँ और इसको यादगार बनाने के लिए ही मैंने दोबारा शादी इसी दिन की ताकि हमेशा 13 जुलाई को ही मैं अपनी शादी की सालगिरह मनाऊँ, वो मुस्कराया। प्रवीण मन ही मन बोला तुमको कभी भूल नही पाया उर्मि इसिलिये 13 जुलाई को ही ये शादी की है। मेरे लिए भी जुलाई का महीना कोई अभिशाप नहीं है प्रवीण क्योंकि जुलाई में ही मैनें पलाश को पुत्ररत्न के रूप में पाया है। और 15 जुलाई को उसका जन्मदिन एक उत्सव जैसा ही है मेरे लिए। इतना कह कर वो मुस्कराई। उसके बदन में एक अकड़ सी आ गयी,  और चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक जो कि कुछ देर पहले तक मुरझाया हुआ था। चलो पलाश, शॉपिंग को लेट हो रहे है। इतना कह कर वो पलाश का हाथ पकड़ कर आगे निकल गयी। उसकी चाल में अब गज़ब का आत्मविश्वास आगया था। मैं 13 जुलाई को बेकार ही मनहूस सोच रही थी, भूल गयी थी कि 13 जुलाई में शादी न होती तो बेटा कहाँ से पैदा होता। नहीं 13 जुलाई मेरे लिए मनहूस नहीं हैं। अभिशाप नहीं है। मेरे लिए भी उत्सव है। मैं भी इसको सेलिब्रेट करूँगी। इतना सोच कर वो मुस्कराई और बेटे के हाथ कस कर पकड़ लिया और आगे बढ़ गयी। राधा गौरांग
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