हमसफ़र!

Poems

यह जिंदगी का सफ़र
कितना सूना
कितना नीरस,

सोच रही हूँ
जीवन की लंबी
सूनी डगर ,
एकाकी कैसे
चल पाउंगी
इस पर,

आगे घोर अंधेरा
और उठा है
झंझावात,
किससे कहूँ
मन की व्यथा
मन की बात,

यह जिंदगी का
सफ़र,
कैसा
सफ़र जहाँ
दर्द बन
गया
हमसफ़र!

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