Poems

मौजूदगी

वो झोंका था हवा,
या खुश्बू का,
एक पल
मौजूद होने का
अहसास दिला
गायब हो गया।

शाख से झरे पत्ते,
ठूंठ सा रह गया पेड़
अकेले रह गए हम
बियाबान जंगल में,
फिर कोई झोंका
सरसरा के कह गया
कानो में
घबरा मत पगले
अभी हूँ तेरे साथ मैं।

राधिका

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