चंदामामा

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आओ रे आओ चंदामामा

बहुत साल हुए तुम्हारे पूड़े खाए हुए, याद है तुमको तुम थाली में खाते थे और
हमको प्याली में देते थे,प्याली हमसे टूट जाती थी और आप रूठ जाते थे.
याद है ना.

अरे हाँ बहुत साल हुए आपने भी तो अपनी अम्मा से ऊन का झंगोला नहीं माँगा
लगता है अब तुमको ठंड नहीं लगती.

चंदा मामा की बड़ी बड़ी आँखो में आँसू, बड़े उदास हो गये और सूबकते हुए कहने लगे
अब कोई माँ अपने बच्चे को मेरी कोई लोरी नहीं सुनाती ना ही कोई कहानी सुनाती है.

बच्चा जब रोता है तो सीधा उसके हाथ में मोबाइल फ़ोन पकड़ा देती है और यू ट्यूब से रिकार्डेड .
गाने सुना देती है. अब तो माँ अपने बच्चो को रात में चंदामामा दिखाने ही नहीं लाती, सुबह
से शाम तक फिर रात को भी टी वी खोल के बच्चों को सामने बैठा देती है और बच्चों को डोरेमन
मोटू पतलू और शिन चेन दिखा दिखा के पता नहीं कौन सा ज्ञान बढ़ा रही हैं बच्चों का?

रही बात ऊन का झंगोला माँ से माँगने की तो अब पता ही नहीं लगता की कब ठंड लग जाए
और कब गरमी? सुना है धरती पे इतना ग्लोबल वार्मिंग हो गया है कि मौसम तक अपना समय
भूल गया है कभी जल्दी आजाता है, कभी लेट हो जाता है. पोल्यूशन भी बहुत हो गया है.

बोलते बोलते बड़े मायूस हो गये थे चंदा मामा.

मुझे लगा की मैने बेकार ही चंदा मामा के दुख को कुरेद दिया और उनको और दुखी कर दिया
मैं भी दुखी मन से चुपचाप उठी और अपनी नोटबुक लेके लिखने बैठ गयी.

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