कहने को सारा आकाश पा लिया है मैने फिर भी…

Poems

 

कहने को सारा आकाश
पा लिया है मैने,
फिर भी लगता कुछ
छूट गया पीछे.

वो मिट्टी का आँगन
सोंधी महक देता,
माँ के हाथ की उबली
बिना दूध की चाय,
सूखी रोटी पर नमक
डाल, बच्चो को देती माँ,

हरे भरे खेतो में
लहलहाते फसलो के बीच
तितलियो के पीछे भागना,
कभी पेड़ो से कच्चे फल
तोड़ कर खाना,

याद है सावन के वो झूले,
मेहन्दी रचे हाथो से, सखियो का
एक दूजे की लट सवारना,

चिड़ियो का आँगन में दाना चुगते
देख खुशी से ताली बजाना,
कभी रोटी छीन कर उड़ते
कौवे के पीछे भागना,

और भी ना जाने कितनी
मीठी मीठी यादें ,
जाने कहाँ छूट गये सब

पता नही कब, आसमाँ
छूने की लालसा मन में
समाई, और कब छूट
गया पीछे सब कुछ,

कहने को सारा आकाश
पा लिया है मैने,
फिर भी बहुत कुछ
छूट गया पीछे.

 

 

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