आधुनिक कृष्ण

Poems

मृग मारिचिका सी राधिका,
आज भी भटक रही है
सन्सार रूपी महावन में,
अपने कृष्ण की तलाश में

लेकिन कृष्ण
महाभारत के कृष्ण की तरह
राधिका को मन में बसायें,
नही कर रहा सन्सार का उद्धार
उसके मन में,
बसी नही आज राधिका,
बसी है सिर्फ़ प्यास, हवस,
चाह दौलत की, या फिर
रेस के मैदान में
टिकी है निगाहें – घोड़ों पर
या फिर तरण ताल में
क्रीड़ा करती सुंदरियों पर.

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